सूर्य मंदिर से रेत निकालने की प्रक्रिया का एएसआई ने किया निरीक्षण।
पुरी : विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थल कोणार्क स्थित ऐतिहासिक और वैभवशाली सूर्य मंदिर के जगमोहन गर्भगृह से रेत निकालने के उद्देश्य से एएसआई के महानिदेशक यदुवीर सिंह रावत ने शनिवार को सूर्य मंदिर का दौरा कर स्थिति का निरीक्षण किया।एएसआई महानिदेशक के साथ सूर्य मंदिर कोर कमेटी के सदस्य, तकनीकी टीम, आईआईटी दिल्ली और आईआईटी मद्रास के प्रोफेसरों ने भी विभिन्न पहलुओं से स्थिति का अध्ययन किया ताकि रेत निकालने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। एएसआई महानिदेशक सहित इस विशेषज्ञ टीम ने सूर्य मंदिर के पश्चिमी द्वार से 80 फुट ऊपर प्रथम तल पर स्थित उन दो कोर ड्रिल स्थलों का निरीक्षण किया, जो मंदिर के गर्भगृह के भीतर तक किए गए थे। सूर्य मंदिर के गर्भगृह से रेत निकालने की प्रक्रिया आसान नहीं है। इसके लिए समय लगेगा और तकनीकी टीम इस संबंध में निर्णय लेगी, ऐसा एएसआई महानिदेशक ने बताया। श्री रावत ने कहा कि गर्भगृह की स्थिति ठीक रहने पर इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जाएगा। इस दौरान कोर कमेटी के सदस्य इंजीनियर अशोक बासा, पुरातत्वविद् डॉ. जीवन पटनायक, डॉ. सुनील पटनायक, डॉ. एन.सी. पाल, एएसआई पुरी सर्कल के अधीक्षक डॉ. मिलन कुमार चावेल, अधीक्षण अभियंता चित्तरंजन दास, इंजीनियर लोकनाथ महारणा, आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर अरुण मेनन, एएसआई केमिस्ट्री अधीक्षक एस.एस. पंडा सहित अन्य उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि 8 सितंबर 2022 को एएसआई और बीडीआर निर्माण विभाग ने सूर्य मंदिर के गर्भगृह के द्वार के निकट पूजा-अर्चना और होम-यज्ञ का आयोजन किया था। सूर्य मंदिर के गर्भगृह से रेत निकालने के लिए एएसआई द्वारा निर्धारित तीन वर्ष की समय-सीमा समाप्त हो जाने के बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने पर सूर्य मंदिर के दौरे पर आए एएसआई महानिदेशक ने असंतोष व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने उपस्थित विशेषज्ञ टीम और एएसआई के वरिष्ठ अधिकारियों को इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए निष्ठापूर्वक प्रयास जारी रखने का निर्देश दिया। गर्भगृह में खुदाई कार्य के लिए वेल्डर, स्टोन ड्रेसर, स्टोन कटर और आर्किटेक्ट नियुक्त किए गए हैं। इस कार्य के तकनीकी मानकों की निगरानी के लिए एएसआई द्वारा एक सपोर्ट सिस्टम टीम, एक डॉक्यूमेंटेशन टीम, एक मैकेनिकल सपोर्ट टीम, एक इंस्ट्रूमेंट एवं इलेक्ट्रॉनिक्स टीम तथा एक कंजर्वेशन टीम का गठन किया गया है। एएसआई द्वारा गठित विभिन्न तकनीकी और विशेषज्ञ टीमों के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से मंदिर से रेत निकालने की प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा और गर्भगृह से रेत निकालने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा, ऐसा एएसआई पुरी सर्कल के अधीक्षक मिलन कुमार चैले ने कहा।

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